• India

    Every particle, even sand says I AM AN INDIAN

  • Indian Tea

    India is a leading producer of TEA, do you wanna have Indian Tea

  • India Heart Of the World

    Take the Aroma of Indian Soil and it's promise that you would not forget it

  • Soil to Sea, it's India

    You may be tired but Scenories will not end, those will come with some new surprises

  • Forts still holds

    An eye catching but surprise everyone, how big and beutiful they are

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9 Sept 2013

Mullayam Red Cap: Colored in Hindu Blood



कुर्ता इनका है हरा, चादर भी इनकी है हरी-हरी,
हरा है रंग बिछावन का, दीवाल भी इनकी है हरी,
लेकिन बंधु तुम ये जान लो, बात मेरी खरी-खरी,
नेता जी उठा चुके हैं, अपनी धोती और चादर हरी।

सोचते सब नेता जी को, शोभे रंग हरा शूरमेदानी है,
सोचे जो ऐसा, क्या कहें उसको, ये उसकी नादानी है,
नेता जी तो जीते हैं, बस खातिर अपने ही लाल के,
चहुओर पाले हैं गुंडे, जो मचाते खातिर इनके बवाल हैं।

बादामी है रंग इनके खद्दर का, टोपी पहनते हैं ये लाल,
टोपी लाल रंगने खातिर, मत पुछो किए कितने बवाल,
सेक्युलर के हरे खून से, रंगते हैं नेता जी अपना रुमाल,
हिन्दू के खून से, रंगवाते हैं अपनी खानदानी टोपी लाल।

टोपी-टोपी करते हैं ये, टोपी अपनी ये लाल रंगवाते हैं,
इस लाल रंग की खातिर, हमेसा हिन्दू का खून बहाते हैं,
कटवा कर हिन्दू को, ये उसका खून अपने पास मँगवाते हैं,
हिन्दू के खून से ये अपनी खानदानी टोपी लाल रंगवाते हैं।

टेढ़ी नाक, तोतली जुबान, दिल है इनका तो बेईमान,
ना है इनका कोई धर्म, ना कभी रखते हैं ये कोई ईमान,
हाड़-मांस का देखो, कलयुग मे आया है ये ऐसा शैतान,
मुल्लों से करता गलबहियाँ, हिन्दू की काटे ये जबान।

ना देखा इस जैसा, मैंने अब तक कोई ठरकी इन्सान,
बातें करता समाजवाद की, पर चलाता ये परिवारवाद,
लेकर लोहिया की कमान, बन बैठा ये तोतला पहलवान,
नाम से हिन्दू, लेकिन फैलाता है केवल ये मुल्लावाद।


6 Feb 2013

We forgot the main cause : Removal of Congress


हम भूल गए सब कुछ

Root of all problems in India "Congress and Soniya family"

हम भूल गए 2जी, 3जी, अवैध खनन, कॉमन वेल्थ, हसन के प्रपंच, कांडा के काण्ड, हम ये भी भूल गए की कैसे पड़ी थी सोते हुए लोगों पर लठियाँ, अपनी माताओं और बहनों के चीत्कारों को हमने सुना नहीं क्यूंकी हम तो ठंडी मे ठंडे पानी की बौछार और ठंड मे ठिठुरते बदन पर पड़ती गरम लाठी को आँसू गैस के गोले के आँसू मे बहा कर भूल गए, हम अब आदर्श ना रहे क्यूँकी वहाँ भी हो गया घोटाला कोई, हमे तो ये भी याद नहीं की मुंबई हमले मे मरा कौन था और कौन हुआ था शहीद, हाथ था उसके पीछे किसका, प्याज की रस मे रोते रहते हैं हम और सब कुछ यूंही सहते रहते हैं हम, विदेशों मे काले धन को काली अंधेरी रात समझ बैठे हम, दे रहे बोफोर्स के दलालों को अपने घर मे पनाह हैं तो कभी भोपाल मे गैस काण्ड के आरोपी को चार्टर प्लेन, कभी मानरेगा मन ऊबा गया हमारा तो कभी हम चौपायों का चारा ही गटक गए, हमे तो आधार कार्ड मिला नहीं पर बांग्लादेशियों को बंट रहा ये कार्ड धड़ाधड़ है, रासन कार्ड की धांधली मे भूखे मर गए तो क्या, किसान को फर्जीवाड़ा और पानी की कमी खा गई, हम पहला जीप घोटाला तो याद ही नहीं करते हैं ठीक वैसे ही जैसे हम 2002 के पहले के हर दंगे को भूल गए, 1984 के सिखों के कत्लेआम को भूल गए तो 30 जनवरी 1948 के बाद हुए मराठी पंडितों के हत्याकांड को भूल गए, कोयले की कालिख मे सफेदी कहीं गुम सी गई थी जिसे हमारी कमजोर याददास्त ने धो दिया, अविरल गंगा के मान और शान को हम भूल गए, गौ माता को हम चारा बना उनको भी भूल गए, या शायद हमे सब कुछ भूल वोटिंग के लिए ईवीएम मशीन ही इसी लिए दी गई की बटन दबाने के समय कुछ याद ही ना रहे और याद भी रहा तो फर्क क्या पड़ता है बल्ब तो वहीं जलेगा जहां मशीन चाहेगी........तिरंगे को ही हम पंजा बना तिरंगे को भुला बैठे, भगवा पर हरा रंग चढ़ाने के प्रयास मे राम को भूल विदेशी को अपना सब कुछ बना बैठे, ये तो कुछ भी नहीं डायन और उसके कपूत को हम अपना भगवान बना बैठे.......आपाधापी के इस दौड़ मे हम खुद को ही भुला बैठे.....

या शायद 1947 मे हम एम॰ के॰ गांधी की एक बात भूल गए...........

देश आजाद होने के बाद हम कॉंग्रेस को  भंग करना भूल गए......


4 Nov 2012

ARE WE UNITE???

आज देश का हर इन्सान चाहे वो देश के किसी भी कोने से हो परेसान है और बहुत ही ज्यादा ही परेसान है. लेकिन इस परेशानी के बाद भी, जो देशवाशियों की रातों की नींद को उड़ा रखा है, इन परेशानियों को भूल दुसरे प्रदेश वालों से जलन का भाव रखते हैं, और हमेसा निम्न दृष्टि से रखते हैं और बेईजत्त करने का एक मौका भी नहीं छोड़ते हैं. उत्तर प्रदेश वाला तामिल से जलता है, महाराष्ट्र बिहारी से जलता है, बंगाल वाले सभी से जलते हैं, जम्मू कश्मीर तो खैर खुद में ही जल गया, केरला की आंच अभी हमारे घरों तक नहीं पहुंची, उत्तर-पूर्व भारत के बारे में हमें कोई खबर पता नहीं चलती है. लेकिन आखिर ऐसा दुर्भाव हमारे अन्दर आया कहाँ से जबकि कांग्रेस रही सत्ता में और कांग्रेस तो कहती है की वो हमेसा लोगों को एक-दुसरे से जोडती है और सभी भारतीय एक हैं ऐसा दिखाती है तो ये कार्य हुआ कैसे. क्या हमारे में से किसी ने इस पर कुछ सोचा है? जबकि हमारे देश के हर प्रदेश का देश के लिए बहुत योगदान रहा है फिर चाहे वो बिहार हो या उड़ीसा हो या तमिलनाडु हो या महाराष्ट्र हो या जम्मू कश्मीर हो या फिर मेघालय मिजोरम अरुणांचल त्रिपुरा और आसाम हैं और इन सभी की अपनी अलग पहचान और उपयोगिता है देश के अन्दर. लेकिन एक देश में रह कर भी हम एक नहीं हैं.


जहाँ तक मुझे प्रतीत होता है की जैसे अंगरेज ऊपर से बहुत विनम्र प्रतीत होते थे लेकिन उनके अन्दर एक धरना होती थी की "फुट डालो और राज करो" वैसे अंगरेजों के द्वारा चालू किया गया अंगरेजों का मनोरंजन करने के लिए बने कांग्रेसी चाहते हैं की हम भारतवाशी कभी एक न हो पायें चाहे कोई भी परिस्थिति क्यूँ ना आ जाये. हम पढ़े लिखे होने के बाद भी आज तक इस कांग्रेस रूपी राक्षस के हाथों की कठपुतली बन घूम रहे हैं. समय आ गया है जागने का और कुछ नहीं तो खुद को जानने का, अपने आस-पास के परिवेश को जानने का, अपने प्रदेश को जानने का, अपने देश के दुसरे प्रदेशों को जानने का और सबसे बड़ी चीज देश को जानने का की हमारा देश अभी किसी परिस्थिति में है और हमारे बाद आज़ाद हुए देश किस परिस्थिति में हैं. उन देशों से अपने देश को पीछे रखने में किसका हाथ है और उन देशों को पीछे धकेलने के लिए हमारे देश को क्या जरुरत है और उसके लिए हमें क्या करना चाहिए.

हमें "अनेकता में एकता", जो हमारे देश की मूल पहचान है, उसे फिर से न सिर्फ जिवंत करना है बल्कि इसके खिलाफ कार्य करने वालों मुंह काला हो जाये.


22 Sept 2012

कोई भी विदेशी शराब १०० रुपये की एक बोतल

मैंने रात को एक सपना देखा...

एक पाउच पेट्रोल १०० रुपये का
गैस सिलिंडर ५००० रुपये का
एक पाउच डीजल ८० रुपये का
१ लिटर दूध ५०० रुपये का
१ प्याज १५० रुपये का
१ आलू १२० रुपये का
हरी सब्जी देखने का केवल २०० रुपये
गाँव ख़तम हो गया मेरा साथ ही और सारे गाँव भी और गाँव वाले भी और मेरे गाँव में केवल विदेशी भरे हैं 
देश में भारतीय किसान नहीं बचा कोई
भारत अब गांवों और किसानों का देश नहीं बल्कि माल और विदेशियों का देश बन गया है

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मैं तो पूरा घबडा गया...लेकिन तभी मैंने आगे देखा की
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मेरे घर के बगल वाली किराना स्टोर पर सरदार जी के जगह एक मस्त अंग्रेजन है छोटे कपड़ों में
कोई भी विदेशी शराब १०० रुपये की एक बोतल
किसी भी वाल-मार्ट या विदेशी स्टोर जाने के लिए घर के सामने एसी गाड़ी खड़ी है
नेस्ले का चोकलेट १०० रुपये किलो
विदेशी दूध घर पहुँचाया जायेगा किसी सुन्दर विदेशी कम कपड़ों वाली बाला से १०० रुपये लीटर
हरी सब्जियां आप जो कहिये वो उपलब्ध है विदेशी मिटटी के साथ १०० रुपये किलो
बगल वाले खेत में एक सुन्दर बाला अपने गोरे मित्र (जो उसका पति नहीं है) के साथ प्यार करते हुए ट्रैक्टर चला कर खेत जोत रही है
गाँव अब शहर बन चुके हैं
देश की प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अमेरिका और बाकि के बाहरी देशों से आ रहे हैं

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अब इतना कुछ तो मिल रहा है इस FDI से. फिर कहें लोग इसका विरोध करने में लगे हैं ये समझ से परे है. भाई हमारी मौजूदा सरकार हमें इतनी सहूलियत दे रही है की हम हर काम में एक कम कपड़ों वाली विदेशी बाला के दर्शन करते रहें. साथ ही केवल और केवल विदेशी चीजें हम खाएं और पियें, पहने और पहनाएं.

अब हम बहुत कुछ सीखेंगे क्यूंकि हर काम यहाँ तक की मुख्य मंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी FDI के जरिये आ रहा है भारत में. केवल चपरासी, मंत्री और विधायक ही भारतीय होंगे लेकिन उनको बोलने का कोई हक़ नहीं बल्कि केवल हाँ और ना में सर हिलाएंगे.

बोलो FDI और इसकी माता की जय



23 Aug 2012

एक देश बिना बेटियों का


एक देश था जो बहुत खुशहाल था| उस देश में सभी पढ़े लिखे थे चाहे थोडा या ज्यादा| सभी प्रेमपूर्वक रहते थे आपस में| सभी के परिवार में आपस में अगाध प्रेम था| कहीं कोई लालच नहीं था किसी तरह का| हर घर में लड़कियां भी थीं जिन्होंने उस देश का नाम बहुत ही ज्यादा गौरवान्वित किया था| बहुत सी लड़कियां डाक्टर बनी थी तो बहुत सी इंजिनियर भी बनी और सबसे ज्यादा ख़ुशी तो तब हो गई जब ये लड़कियां देश की सेना में भारती हुईं| कोई-कोई लड़की तो देश के अलग-अलग भागों की मुख्यमंत्री और देश की प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति बनी| सभी माता-पिता अपने बेटियों से खुश थे| हर तरफ लड़कियों की तूती बोल रही थी|

पर अचानक उस देश की खुशियाँ धीरे-धीरे ख़तम होने लगीं जैसे की किसी ने उस देश की खुशियों को नजर लगा दी हों| उस देश में बच्चियां कम होनी चालू हो गईं| जिनके पास थीं भी उनको घर में कैद करके रखा जाने लगा| तरह-तरह की पाबंदियां लगने लगीं लड़कियों पर| लड़कियों का जीवन दूभर हो गया| लड़कों को दुल्हन के लिए लड़कियां नहीं मिल रही थीं| घरों में केवल पुरुष ही पुरुष या बुजुर्ग महिलाएं दिखाई दे रही थीं| कोई बहन या पत्नी या बेटी नहीं दिखाई दे रही थी|

ये अशुभ दिन की शुरुवात कुछ समय पहले शुरू हुआ जब मूल को भूल उस खुशहाल देश के नागरिक ब्याज के तरफ भागना चालू किये| दहेज़ नाम के एक दानव का देश में प्रादुर्भाव हुआ तथा जिस तरह हम अपने मूल ग्रंथों से दूर होते गए जिसमे स्त्रियों को आराध्य और सर्वोच्च स्थान प्राप्त था| पर उन ग्रंथों को इस तरीके से तोडा-मरोड़ा गया की स्त्रियाँ जैसे शैतान का रूप हो गईं|

उसी समय विज्ञानं ने एक चमत्कार किया| बच्चा पैदा होने से पहले उसके लिंग परिक्षण का| लोगों की कतारें लग गईं बच्चों के लिंग परिक्षण की| सभी को बेटा चाहिए था| बेटियां किसी को नहीं चाहिए थी| महिला डाक्टर ही बच्चियों को गर्भ में ही मार रही थीं और महिलाएं ही बढ़-चढ़ कर मरवा रही थीं बच्चियों को गर्भ में ही| बच्चियों की संख्या कम और बच्चों की संख्या बढाती जा रही थी| धीरे-धीरे उस देश से बच्चियां गायब हो गईं| कोई बच्ची उस देश में बची ही नहीं| जब बच्चे बड़े हुए तब शादी के लिए लड़की खोजी जाने लगी| किसी लड़के के लिए कोई दुल्हन ही नहीं मिल रही थी|

उसी समय उस देश के बुजुर्गों से पहले वहां के युवाओं ने ये फैसला लिया की वो दहेज़ नहीं लेंगे और बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं रखेंगे| जैसे ही दहेज़ नाम के दानव को लोगों ने अपने अन्दर से निकल फेंका उसी समय बेटियों की संख्या बढ़ने लगी देश में और देश फिर से खुशहाल होने लगा|

उस देश के निवासियों ने बाकि सभी से भी दहेज़ रूपी दानव को मरने का आग्रह किया ताकि हर देश सुखी और खुश हो सकें|



8 Aug 2012

एक देश जहाँ केवल अंधे बसते हैं



एक देश में केवल अंधे रहते थे चाहे वो राजा हो प्रजा, बुड्ढा हो या बच्चा, मर्द हो या औरत| लेकिन सभी अंधे होने के बाद भी सारे काम बहुत ही बढ़िया तरीके से एक आंख वाले इन्सान की तरह करते थे| कहीं भी कोई परेशानी नहीं थी अंधेपन के वजह से| सभी खुश थे और बहुत खुश थे अपने अंधेपन में|

तभी उस देश में एक आंख वाला आया| उसको बहुत अचम्भा हुआ की सभी अंधे हैं लेकिन काम कैसे करते होंगे ये लोग| उस आंख वाले नए इन्सान ने इन अंधों के साथ रहना चालू किया| इसी दौरान उस आंख वाले को एक अंधी पर बहुत ही खुबसूरत लड़की से प्यार हो गया| जब भी दोनों साथ होते और कुछ अच्छा दीखता था उस आंख वाले को तो आंख वाला व्यक्ति उस वास्तु या रंग की तारीफ कर देता था| परन्तु इस पर लड़की थोडा चिढ जाती थी और बार पूछती थी की क्या है या ये रंग क्या होता है कैसा दीखता है| इस प्रश्न के उत्तर में आंख वाला बार-बार बोलता था की ये सिर्फ आंख वाले को दिख सकता है| इस उत्तर पर लड़की चुप सी हो जाती थी लेकिन अन्दर एक तिस उभर आती थी उसकी| उस आंख वाले ने उस लड़की के अंधे होने के बाद भी उससे शादी करने का प्रस्ताव रखा| ये सुनने के बाद लड़की अपने घर के बड़ों के पास गई| घर के बड़े लोगो ने पंचायत बुलाई इस पर फैसला करने के लिए|

पंचायत ने जैसे ही ये सुना की नया व्यक्ति जो उनके देश की लड़की से प्यार करता है असल में देख सकता है तो सभी नवयुवक गुस्से में आ गए जैसे उनके हाथों से रेत फिसल रही हो और उनके दिल में जल रही रौशनी बुझाने वाली हो| नवयुवकों के गुस्से को देख बूढों ने उनको शांत कराते हुए कहा की ये आंख का होना बहुत गन्दी बीमारी है और कई सारी बीमारियाँ केवल इस आंख के वजह से फैलती हैं| हर चीजें देख लेती हैं ये आंखे और उस वजह से कई सारी परेसनियाँ बढ़ जाती हैं| लेकिन इस आंख के होने की बीमारी का इलाज हो सकता है| हम इसकी भी आंख निकल कर इसको भी अपने मानिंद कर देते हैं और तब कोई परेशानी नहीं होगी|

इतना सुनना था की आंख वाला इन्सान भागा और उसके पीछे भागे सारे अंधे देसवाशी ताकि उस आंख वाले को भी अँधा कर सकें| उस भीड़ में वो अंधी लड़की भी भाग रही थी उस आंख वाले के पीछे और चिल्ला रही थी की कहाँ भाग रहे हो आ जाओ तुम ठीक हो जाओगे तुम्हे देख पाने की बीमारी है पर हम तुम्हे प्यार से अपने जैसा बना देंगे तब कोई परेशानी नहीं रहेगी| तुम आंख वाले हो परन्तु मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुम्हे अपना जैसा बनाने के बाद मैं और ज्यादा प्यार दूंगी| लड़की माँ बोली बेटा तुम मेरे बेटे जैसे हो लेकिन केवल देख सकते हो अतः तुम भी हमारे जैसे अंधे बन जाओ तो तुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी| अंधे देश का राजा बोला उस आंख वाले को की तुम देख सकोगे तो बहुत परेशानी होगी, राज-काज का सारा काम ढंग से देख सकोगे जो मैं नहीं चाहता अतः तुम भी औरों की तरह बन जाओ और ख़ुशी-ख़ुशी रहो|

परन्तु आंख वाले ने किसी का नहीं सुना और केवल अपनी आंख बचा सकने हेतु भागता रहा| भागते-भागते आंख वाला अपने देश में पहुंचा और चैन की साँस ली|




25 Jul 2012

पुरनकी कांग्रेस मर गइल आ ई चुतिया आ गईलअ सन!!!


पैसा लोगो से क्या क्या न करवाए!
सुनिए गाँव के दो दोस्तों की बातें हमारे कांग्रेस के बारे में....
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का कहत हो भैया?
अरे तब का भइयो देखे नाही का की कैसे हमार चुनिया आ उनके दुनो मुनिया बाकि के झुनिया के संगे मिली के कैसे दुनिया (भारत) के चुना लगाय देह लस|

अरे चल भईवो एतना ता चलबे करी|

अरे का कहा तारअ ए दादा अरे इन्हनी के जाती देख ये भाई ई पईसा के खातिर ता कुछवु कई जईहन स|

अरे नाही भाई अइसन जनी कहअ!

अरे भक बुडबक देख कैसे चुनियावा लुट लिह लस देश के पतोह (बहु) बनी के आ अब ए कर पोसल पिल्ला ता देश के ऐसे बर्बाद करे पर लागल बाड सन की पुछअ मत...अभी तक ता ई कोंग्रेसी बुलु फिलिम बनावट रहला हा सन लेकिन अब ता इन्हनी के एकरो से आगे निकल गईला सन अब इन्हनी के देश के लईकन के नशा करावत बाड़ा सन...एगो ए चुनियावा के पार्टी के छत्तीसगढ़ के नेता उमाशंकर श्रीवास्तव ता गांजा बेचा ता भाई आ उहो एक-आध पुडिया ना बाकि सीधा ७ किलो...मरदे किलो के हिसाब से ई कांग्रेसी ससुरा नासा बेचअ तारअ सन...आ ई ज कांग्रेसी पर पहिला केस नइखे ई कांग्रेसी एकरा पाहिले भी कईगो इसने केस में पकड़ा चुकल बा!!!

ए भाई हम ता समझत रहिना हां की ई कांग्रेसे हमनी के आज़ादी दिलौले रहे ता हम एकरा के सपोर्ट करत रहनी हा....लेकिन बुझाता की पुरनकी कांग्रेस मर गइल आ ई चुतिया आ गईलअ सन!!! अब एकरा के कबो भी हम वोट ना देब बल्कि हम खाली सही आदमी के वोट देब...नरेन्द्र मोदी भाई के!!!



1 Jun 2012

व्यथा एक गाँव कि !!!


एक गाँव था भारत में| जिसका नाम सुखसागर था| वहां कुछ छोटे और कुछ बड़े किसान रहते थे| सभी में बड़ा प्रेम था| सब मिल जुल कर रहा करते थे| मेहनत करते थे जम कर और फसल इतनी अच्छी पैदा होती थी की वहां से शहरों में भेजी जाती थी| उन फसलों के वजह से शहरियों को भोजन मिल रहा था| साथ ही ये किसान जिनके पास जीवन-यापन का खेती के अलावा कुछ नहीं था फिर भी ये खुश रहा करते थे अपनी अच्छी पैदावार के वजह से|

उसी गाँव में एक छोटा किसान था जिसका नाम था सुरेश| सुरेश के परिवार में कई लोग थे एक भरा पूरा परिवार था| सुरेश, सुरेश की माँ, सुरेश के पिता, सुरेश की बीवी, सुरेश के ३ बच्चे एक छोटी बहन जो शादी के योग्य हो गई थी और उसकी शादी तय भी हो गई थी एक किसान के ही घर में और बहन अभी पढाई भी कर रही थी, एक छोटा भाई जो पढाई कर रहा था| इस पुरे परिवार की जिम्मेदारी सुरेश के ऊपर थी और इनका पूरा जीवन-यापन केन्द्रित था खेती पर| चाहे कड़कती धुप हो या ठिठुरनभरी ठण्ड या फिर मुसलाधार बारिश सुरेश हमेसा अपने खेती को संवारने में लगा था| सुरेश की मेहनत का नतीजा था की पुरे गाँव में लोग उसके मेहनत और उसके फसलों की दाद दिया करते थे|

पर २ फसल पहले हुआ कुछ ऐसा जिसने सुरेश और सुरेश जैसे और किसानो की कमर तोड़ दी|

लगातार बढ़ रहे डीजल के दाम ने खेतों की जुताई को इतना महंगा कर दिया की खेत परती रहने लगे लोगों के|

गायों की संख्या कम हो जाने के वजह से गायों का दाम इतना बढ़ गया की गाय की कीमत किसानो के खरीदने की शक्ति से ऊपर चली गई और यही हल हुआ बैलों के साथ| किसानो के यहाँ बैल नहीं मिल पा रहा है| चारा तो कोई और खा जा रहा था तो उन गरीब किसानो के पास चारा के लिए कोई साधन नहीं बचा था| अब सुरेश जैसे किसानो के लिए खेतों की जुताई एक असंभव कार्य हो गया?

उस पर से सुरेश जैसे किसानो के ताबूत में आखिरी किल साबित हुआ जब खेतों में डाली जाने वाली खाद जो उस समय ४२० रुपये की थी पर मिलती थी ४८० रुपये में| वही खाद पिछले फसल में बढ़ कर ९५० रुपये की हो गई परमिलती थी ९८० रुपये की|

पर सुरेश जैसे किसानो के लिए सबसे खतरनाक बात हुई जब उसी खाद को कहा जाने लगा की वो १९६० रुपये की मिलेगी| अब पिछली फसल में जो कर्ज लिया था वो वापस नहीं हो पाया था क्यूंकि पानी सही से नहीं मिला था| और इस बार कहीं से मदद नहीं मिल रही थी सुरेश को ताकि वो फसल की बोवाई कर सके| तभी उसे पता चला की बैंक से लोन मिल रहा है किसानो को| सुरेश बैंक गया और वहां के बैंक मैनेजर से मिला| बैंक मैनेजर ने कहा की लोन तो सुरेश तुमको मिल जायेगा पर उस बैंक मैनेजर ने ऐसी शर्त रखी की उसे सुन कर सुरेश वहीँ फफक-फफक कर रो दिया| बैंक मैनेजर ने सुरेश से लोन का एक हिस्सा लोन सैंक्सन होने से पहले ही माँगा| सुरेश जिसकी इतनी भी हैसियत नहीं थी की वो एक बोरी खाद खरीद सकता था वो इतना पैसा कहाँ से देता|

सुरेश बैंक से घर आया| सुरेश की माँ और बीवी गाँव के बड़े महुवा के पेड़ से महुवा चुन कर लायीं थी क्युकी उनके पास खाना बनाने को कुछ नहीं था| पर सुरेश की रोनी हालत देख सभी की भूख मर गई| बच्चे भूख से बिल-बिला रहे थे| घर में शादी का सामान एक तरफ रखा हुआ था| पर अब पुरे घर को चिंता हो गई की जहाँ घर के लोगों को खाने के लिए कुछ नहीं है वहां बारात का स्वागत कैसे करेंगे|

सुरेश घर आते वक़्त बाजार से अपने अंतिम बचे हुए पैसे एक पुडिया लाया था| उसने अपनी बीवी से बोला की सुरीली तुम माँ का पैर दबाओ माँ थकी हुई है मैं महुवा का हलवा बनता हूँ| सुरेश हलवा बनाने गया और उस हलवे में उसने उस पुडिया को उड़ेल दिया और बड़े प्यार से वो हलवा पुरे परिवार को दिया उसने| सारे बच्चो, माँ-बाप, भाई-बहन और बीवी के साथ सुरेश ने भी हलवा खाया|

रात गुजरी और हर दिन की तरह सुबह हुई| सुरेश का चचेरा भाई रमेश और कुछ पडोसी सुरेश से मिलने आये पर सुरेश के घर का दरवाजा अभी तक बंद था| सभी को अचम्भा हुआ की जो सुरेश और उसका परिवार तडके सुबह उठ जाता था वो आज इतना दिन चढ़ने पर भी कैसे सोया हुआ है| बहुत बार दरवाजा बजने पर भी जब दरवाजा नहीं खुला तो सुरेश का भाई अपने छत से सुरेश के घर में दाखिल हुआ| घर में दाखिल होते ही सुरेश के भाई की हृदयविदारक चीख निकल गई| घर के अन्दर सुरेश का पूरा परिवार मरा पड़ा था| कही बच्चे लुढके पड़े थे तो कहीं बूढ़े माँ-बाप| गाँव वालो ने कैसे कैसे करके आपस में चंदा करके सुरेश के परिवार का दाह-संस्कार किया|

बात आई गई और हो गई| पर धीरे-धीरे पूरा गाँव एक श्मसान में तब्दील हो गया| क्युकी न तो पिने को साफ़ पानी मिल रहा था और न ही खाने को कुछ था और न ही उगने को कुछ था| प्रशासन ने खुश हो उस गाँव को एक होटल के व्यापारी को दान कर दिया| उस होटल के व्यापारी ने उस श्मसान को एक शानदार होटल में तब्दील कर दिया जहाँ आए दिन अब पार्टियाँ होती हैं और पार्टी करने वाले और कोई नहीं हमारे बेशर्म नेता हैं| जिस गाँव सुखसागर में अभी तक खाने बिना लोग मर गए उसी गाँव में आज नदियाँ बह रही हैं कबाब, शबाब और शराब की|

अब इन नेताओं को इन्तेजार है ऐसे ही किसी गाँव के खाली होने का ताकि वहां भी कोई होटल या गायों का कत्लखाना बनाया जा सके|

क्या आपकी जानकारी में है कोई ऐसा गाँव जो श्मसान में तब्दील हो चूका हो तो हमारे नेताओं को बता दें बड़ी कृपा होगी|