30 Mar 2012

नेटीजन्स या सिटीजंस

अंततोगत्वा सोसिअल नेट्वोर्किंग साइट्स का प्रभाव देखने को मिला दुनिया में.......दुनिया के कई कोने में बड़े-बड़े क्रांति आ गई और वहां की भ्रष्ट सरकारे या तानाशाह ख़तम हो गए.....इसमें एक बहुत बड़ा हाथ सोसिअल नेटवर्किंग साइट्स का रहा....पर वो क्रांति हमारे भारत में क्यों नहीं दिखती है

इसका कारन बहुत आसान है......यहाँ NETIZENS (FACEBOOKIYE and SOCIAL NETWORKING WORMS ) हैं, CITIZENS नहीं.....सब बड़ी-बड़ी बाते लिख सकते हैं....लिख कर एक दुसरे को गलियां दे सकते हैं और अपने आप को बहुत बड़ा देशभक्त या क्रन्तिकारी दिखा सकते हैं.....लेकिन इन लोगो से कोई क्रांति नहीं आ सकती कभी देश में......इनसे केवल गन्दगी फ़ैल सकती है....और फ़ैल रहा है जिसका कही न कही खामियाजा हो ही रहा है|

आप क्या चाहते हैं?

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