8 Sep 2013

Why media keep silence on anti-national Christian and Muslims


Opus dei इसाई समुदाय द्वारा पोषित मीडिया वाले जैसे दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही लगातार टीवी चैनल पर "सर्व धर्म समभाव" का पाठ पढ़ाते दिख रहे हैं! क्या यह जनता को दिग्भ्रमित करने वाला नहीं है? क्यों मीडिया वाले सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत नहीं रखते? या तो इनको इस देश की सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान ही नहीं है या यह जानबूझ कर पैसा खा कर देशद्रोह और मक्कारी कर रहे हैं! 

क्यों मीडिया के मस्जिदों में पनपते 'इस्लामिक आतंवाद' की बात नहीं करते? क्यों वह नहीं बताते की आजकल मदरसों में केवल आतंकवादियों का निर्माण हो रहा है! क्यों नहीं बताते कि मस्जिदों में प्रतिबंधित अत्याधुनिक बिना लाइसेंस के हथियार संगृहीत कर के रखे जाते हैं जिसका कि दंगा फसाद में अनुचित और बर्बर प्रयोग होता है! अगर सच से आगाह करा दिया जाता तो पता नहीं कितने मासूम लोगो की जान बच जाती! क्यों मीडिया ऐसे "सर्व धर्म समभाव" की बात कर रही है जिससे की आतंकवादियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं? आतंकवादियों को पता है कि सारे कुकर्म करने के बाद भी उनको मासूम घोषित कर दिया जायेगा और भले ही दंगा उन्होंने शुरू किया हो इसका आधा श्रेय मासूम जनता के सर मढ़ दिया जायेगा! फिर क्या वह बरी और आज़ादी से फिर दंगा फसाद करने को स्वतंत्र! क्यों मीडिया 'विषधर नाग' को 'रस्सी' जैसा हानिरहित बता कर मासूम लोगो तो खतरे की तरफ लगातार धकेल रही है? क्या इसके लिए इनके खिलाफ PIL दाखिल नहीं होनी चाहिए?

कैथोलिक चर्च में हो रहे कुकर्मो की बात क्यों नहीं करती है मीडिया? दीपक चौरसिया और विजय विद्रोही जैसे मूर्खो को तो शायद यह भी नहीं पता होगा की जीसस स्वयं क्रिस्चियन नहीं थे! रोमन लोगो ने उनको सूली पर चढ़ाया था और सौ साल स्वयं के फायदे के लिए रोमन ने ही जीसस के नाम को राजनैतिक हथियार की तरह  इस्तेमाल किया! इसाई धर्म की स्थापना जीसस की मृत्यु के सौ साल बाद उनके जीवन पर लिखे गए विभिन्न gospels/ वृतान्तो को संग्रहीत कर के की गयी थी! सैकड़ो में लिखे गए वृतान्तो में केवल 18 वृतांत चुन कर "ओल्ड टेस्टामेंट"/बाइबिल बनाया गया था! जिन रोमन्स ने जीसस का बेदर्दी से क़त्ल किया आज वह कैथोलिक चर्च खोल के धर्म के ठेकेदार बन बैठे हैं! आखिर क्यों ना हो जिसके पास स्वर्ग की चाभी होगी वही तो दुनिया पर राज करता आया है! 

"सर्व धर्म समभाव" की बात बुद्ध के समय की है जब की इस्लाम और क्रिश्चियनिटी का नामो निशान नहीं था! वैसे भी हिन्दू धर्म में 'धर्म' का मतलब 'मज़हब' या 'religion' नहीं होता है! धर्म का अर्थ सही या  righteous मार्ग होता है जिसमे मानव जाती, पर्यावरण, जीव जंतु, सृष्टि, अंतरिक्ष हर किसी के प्रति मानवीय उत्तरदायित्व की बात की गयी है! 

"सर्व धर्म समभाव" और "वसुधैव कुटुम्बकम" का अर्थ इस देश की संस्कृति के परिपेक्ष में मेरी समझ में ईश्वरवाद और अनीश्वरवाद के सन्दर्भ में किया गया है और दोनों ही विचारधाराओ को मान्यता देते हैं! कोई भी विचारधारा हो और अगर उसका मूल तत्व मानव समाज का भला, उन्नति और उत्थान नहीं है तो वह इस देश के अनुकूल नहीं है! समय के हिसाब से अगर कुछ कुरीतियाँ आ भी गयी है तो हमे उसको अपने आप सुधारना है ना कि उसके गलत अर्थ से सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना है! मुझे ब्राह्मणों से कोई द्वेष नहीं है परन्तु यदि ब्राह्मण अपनी विद्वता, कर्म और उद्देश्य को छोड़ देता है तो उसको हम कैसे सम्मान दे सकते हैं? बिना किसी विवाद में फंसे मैं सबसे प्रार्थना करूँगा की वह श्री सी गोपालाचार्य द्वारा लिखित 'महाभारत' को पढ़ कर देख लें! जहां पर साफ़ साफ़ लिखा है की ना कोई जन्म से ब्राह्मण है और ना जन्म से शुद्र!

हमारे देश की संस्कृति में अगर हिन्दू विचारधारा को तार तार कर के चर्चा की जा सकती है तो हम इस्लाम क्रिश्चियनिटी कम्युनिज्म साधू संत सोनिया गाँधी मनमोहन सिंह को तार तार करके क्यों नहीं चर्चा कर सकते! जब हम भगवन के अस्तित्व पर प्रश्न उठा सकते हैं तब फिर बाकि सब तो बहुत छोटी मोती चीज़ें हैं!

अंत में इस्लाम के जानने वाले ज्ञाता यह बतायेंगे की खुदा ने गिब्रैल के द्वारा मोहम्मद से क्यों बात करी क्या खुदा मोहम्मद से सीधे बात नहीं कर सकते थे? मुल्ला मौलवी अपने स्वार्थ के लिए इस्लाम को तोड़ने मरोड़ने को आज़ाद क्यों हैं?

Written By: गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव

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